मुस्लिम महिलाएं क्यों पहनती है बुर्का, वजह जानकर होंगे हैरान

मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ कुरान में पर्दे को एक खास स्थान दिया है। पराए धन और पराई स्त्री की तरफ नजर जाने को भी इस्लाम धर्म में पाप माना जाता है। अदब को कुरान में जरूरी माना गया है। मुस्लिम धर्म में किसी भी स्त्री को बिना सिर पर पर्दे के नहीं रहना चाहिए। इस्लाम धर्म में यह माना जाता है कि अपनी स्त्रियों को हमेशा पर्दे में रखना चाहिए, ताकि उन पर किसी पराए मर्द की नजर ना पड़ सके। इसी सोच को पूरा करने के लिए इस्लाम धर्म में स्त्रियों को काला बुर्का पहनने का आदेश दिया गया है। आइए आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि आखिर कैसे शुरुआत हुई काले बुर्के की। 

कैसे हुई परदे की चलन:

मुस्लिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहेब के परिवार में स्त्रियों का स्वभाव और रहन-सहन ऐसा था कि उनके पूरे जीवन में कभी भी किसी ने उन स्त्रियों की परछाई तक नहीं देखी थी। उनका यही आदर्श, आचरण और धीमी आदर से भरपूर आवाज के साथ बेहतरीन तरीका पूरे मक्का में प्रसिद्ध था। मुस्लिम मोहम्मद पैगंबर हजरत मोहम्मद साहेब के परिवार की स्त्रियों के अदब की प्रशंसा पूरे मक्का में हुआ करती थी। 

मुस्लिम मोहम्मद पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की परिवार की स्त्रियों से पूरा मक्का काफी खुश था। उनके अदब से मक्का के लोग इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी स्त्रियों को भी पर्दे में रहने का आदेश दे दिया। ठीक उसी समय से मुस्लिम समाज में पर्दे को अदब जताने का सलीका माना जाने लगा। तब से लेकर आज तक मुस्लिम स्त्रियां हमेशा काला बुर्का पहन कर रखते हैं।

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