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इस्लाम के वो 15 दिन, जब कांप गया था पूरा ‘मक्का’! (History of Kaaba Attack 1979)

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Kaaba Attack 1979

Kaaba Attack 1979

Kaaba Attack 1979: इस्लाम के इतिहास में एक ऐसा भी दौर आया था जिसने पूरे इस्लाम को हिला कर रख दिया था। इस्लाम के सबसे पवित्र जगह मक्का की मस्जिद में एक ऐसी घटना घटी जिसके बाद हर कोई हैरान रह गया। 40 साल पहले नवंबर में मक्का की मस्जिद में 15 दिन तक ऐसी घटना घटित हुई जिससे सबके पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी। ये वो घटना थी, जिसमें सलाफ़ी समूह ने मक्का मस्जिद पर अपना कब्ज़ा कर लिया था। इस घटना के दौरान लाखों लोगों की जान चली गई थी। आईए विस्तार से जानते हैं के 40 साल पहले पवित्र मक्का मसजिद में क्या हुआ था?

क्या हुआ था उस दिन? (History of Kaaba Attack 1979)

इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से साल 1400 की पहली तारीख़ यानि 20 नवंबर, 1979 थी। इस दिन देश-विदेश से हज यात्रा पर हज़ारों-लाखों लोग शामिल हुए थे। इस दिन मक्का मस्जिद में लाखों हज यात्री शाम को नमाज़ का इंतज़ार कर रहे थे। जब नमाज़ खत्म ही हुई थी तब सफेद रंग के चोलों में करीब 200 लोगों ने मस्जिद में ऑटोमैटिक हथियार दाग लिए। इन 200 लोगों में से कुछ ने इमाम को घेर लिया और मस्जिद का माइक अपने कब्ज़े में कर लिया।

फिर माइक से ऐलान हुआ “हम माहदी के आगमन का एलान करते हैं, जो अन्याय और अत्याचारों से भरी इस धरती में न्याय और निष्पक्षता लाएंगे।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस्लाम में माहदी ऐसे उद्धारक को कहा जाता है जो क़यामत से पहले राज करते हुए बुराई का नाश करता है। यह सुनकर हज यात्री खुश हो गए और उन्हें लगा कि कयामत के दिन शुरू हो गए हैं। वे ख़ुशी से कह रहे थे- अल्लाह हु अकबर।

कौन थे ये हमलावर? (Who Attacked Grand Mosque Mecca)

Juhayman

हमलावर कट्टरपंथी सुन्नी मुस्लिम सलाफ़ी का समूह था जिसका नेतृत्व बदू मूल के सऊदी प्रचारक कर रहा था। इसका नाम जुहेमान अल-ओतायबी था। जब मस्जिद में घोषणा की गई कि माहदी आ गए हैं, उस बीच हमलावरों में से एक आदमी भीड़ की ओर बड़ा। इस शख्स का नाम मोहम्मदद अब्दुल्ला अल-क़हतानी था। लोगों से कहा गया कि अल-क़हतानी ही माहदी है जिसके आने का सभी को इंतज़ार है। फिर सलाफ़ी के लीडर जुहेमान ने कहतानी को सम्मान दिया ताकि सब उसे सम्मान दें। इसके बाद असली खेल शुरू हुआ जिससे सबकी रूह कांप गई।

हज यात्रा पर आए लगभग 1 लाख लोगों को बंधक बना लिया गया। हमलावरों ने दूसरे देशों के बंधंकों को छोड़ दिया लेकिन सऊदी निवासियों को ऐसी कोई रियायत नहीं दी गई। उनके मुताबकि सऊदी साम्राज्य अपने धार्मिक पथ से भटक गए था और पश्चिमी देशों के इशारे पर नच रहा था। बता दें कि लीडर जुहेमान पहले सऊदी सेना का हिस्सा रह चुका था।

जानिए कैसे हुआ कब्ज़ा और इसके बाद संघर्ष

जब माहदी को सम्मान दिया जा रहा था, तब एक युवा छात्र मस्जिद के अंदर ये देखने गया कि आखिर हो क्या रहा है? उसने अंदर जो देखा उससे वो हैरान रह गया। उसने बताया, “लोग हैरान थे. उन्होंने अल हरम मस्जिद में पहली बार किसी को बंदूक़ों के साथ देखा। ऐसा पहली बार हुआ। वो डरे हुए थे।” आगे जुहेमान ने अपने साथियों से कहा कि मस्जिद को सब जगह से घेर लो। हज़ारों हज यात्रियों को बंधक बना लिया गया।

इसके बाद दीवारों पर स्नाइपर तैनात हो गए जो ‘माहदी के दुश्मनों’ से लड़ने के लिए थे। जुहेमान का सूमह सऊदी बलों को अनैतिक और पश्चिम सभ्यता से जुड़े हुए मानते थे। इसलिए जैसे ही पुलिस अधिकारी मस्जिद में देखने के लिए पहुंचे कि आखिर मसला क्या है? तभी हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसा दीं। और इस तरह से मस्जिद को हमलावरों ने अपने कब्ज़े में कर लिया।

ये था सऊदी अरब का प्लान (Saudi Arab Mosque Rescue Plan)

kaaba attack 1979

उस समय अमेरिकी डिप्लोमैट मार्क ग्रेगरी हैम्बली जेद्दा के दूतावास में बतौर राजनीतिक अधिकारी तैनात थे। उनके मुताबिक, हमालवरों के पास बहुत अच्छे और ऑटोमैटिक हथियार थे जिससे उन्होंने मस्जिद और लोगों को काफी नुकसान पहुंचाया था। सऊदी अरब ने मस्जिद पर कब्ज़ा हो जाने की खबरों का प्रसारण पूर्ण रूप से बंद कर दिया था। बहुत ही नाम मात्र के लोग जानते थे कि मस्जिद पर कब्ज़ा क्यों और किसने किया है। हैंबली के मुताबिक, सऊदी राष्ट्रीय गार्ड ने बेहद होशियारी से एक अभियान चलाने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब हो गए और कई लोगों की जानें चली गईं। इसके बाद सऊदी प्रशासन ने हज़ारों सैैनिकों और स्पेशल फॉर्सेस को अच्छे हथियारों के साथ मस्जिद के लिए भेज दिया। ऊपर से कई लड़ाकू विमान भी तैनात किए गए।

मस्जिद को पहुंचा भारी नुकसान

kabba attack 1979

सऊदी बलों ने मस्जिद पर लगातार कई हमले किए जिससे लड़ाई अगले दिन काफी भीषण हो गई। हमले में मस्जिद का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। मस्जिद के अंदर मौजूद सैंकड़ों लोगों की जानें चली गईं। मस्जिद के ऊपर तैनात लड़ाकू विमान ने तोपों की मदद से मिनारों को निशाना बना लिया। जिसके कारण मक्का मस्जिद को भारी नुकसान पहुंचा।

इस्लाम में मान्यता है कि जो माहदी होते हैं उनकी मौत नहीं हो सकती है। तो अगर मोहम्मद अब्दुल्ला अल-क़हतानी माहदी होते तो उनकी मौत नहीं होती। लेकिन अब्दुल मुने सुल्तान बताते हैं कि कहतानी ने मरे हुए और घायल हुए लड़ाकों के हथियार उठाकर उन लोगों को दिए जो निहत्थे थे या जिनकी गोलियां खत्म हो जाती थीं। सुल्तान ने आगे बताया, “दूसरे दिन मैंने क़हतानी की आंखों के नीचे दो घाव देखे। शायद उन्हें लगता था कि वह माहदी हैं और उन्हें कुछ नहीं होगा, इसलिए वे कहीं भी आराम से घूम रहे थे। मैंने जुहेमान को भी करीब से देखा।”

“हमने काबा के पीछे शरण ली, वह जगह सुरक्षित थी. वह आधे घंटे तक मेरी गोद में सोए. उनकी पत्नी उनके साथ आख़िर तक रही. जब लड़ाई गहरी हो गई तब वह जागे और हथियार लेकर अपने साथियों के पास चले गए।” उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षा बलों को मस्जिद के अंदर आकर पहले कल पर कंट्रोल हासिल करने में सफलता मिली। इस बीच सऊदी सुरक्षा बलों को मस्जिद के अंदर आकर पहले तल पर नियंत्रण करने में क़ामयाबी पाई.

कैसे हुई माहदी की मौत

दिन प्रतिदिन जैसे-जैसे ये लड़ाई भीषण रूप लेने लगी तभी खुद को माहदी बताने वाला कहतानी घायल हो गया। जबकि इस्लामिक मान्यताओं में माहदी की तो मौत हो ही नहीं सकती थी। जिस समय कहतानी दूसरी मंज़िल पर था तब वहां से लोगों के चिल्लाने की आवाज़े आईं कि माहदी जख्मी हो गए, माहदी को गोली लगी है। लोग उन्हें बचाने के लिए उनकी ओर बढ़े लेकिन भारी गोलीबारी के कारण वे वहां नहीं जा सके। और खुद को माहदी बताने वाले कहतानी की मौत हो गई।

पाकिस्तान और फ्रांस ने ऐसे की मदद (Kaaba Attack 1979)

History of Kaaba Attack 1979
History of Kaaba Attack 1979

मस्जिद पर हमलावरों के इस कब्जें का नाश करने के लिए सऊदी बलों की मदद करने के लिए पाकिस्तान और फ्रांस आगे आया। पाकिस्तान ने अपने कमांडो की टीम सऊदी के लिए रवाना की। वहीं फ्रांस के कुछ कमांडो एक गुप्त अभियान के तहत सऊदी अरब आए। उन्होंने सुरक्षा बलों को एक प्लान बताया और कुछ उपकरण और हथियार वगैराह मुहैया कराए। एक योजना तैयार की गई कि अंडरग्राउंड यानि बेसमेंट में छिपे लड़ाकों को गैस का उपयोग करके बाहर निकाला जाएगा। और ये जंग 15 दिन तक जारी रही। हर जगह से फंस चुके लड़ाकों नें 2 हफ्ते बाद आत्मसमर्पण कर दिया। और पवित्र मक्का मस्जिद एक बार फिर से सुरक्षित हो गई।

सऊदी अरब ने दी ये सज़ा (Kaaba Attack 1979)

सऊदी अरब ने 63 लोगों को फांसी दे दी, इसमें समूह का लीडर जुहेमान भी शामिल था। और बाकियों को जेल में डाल दिया गया। इसके बाद सऊदी ने खुद को माहदी बताए जाने वाले कहतानी की तस्वीर प्रकाशित की। बेशक मस्जिद को बेहद नुकसान पहुंचा था लेकिन मक्का एक दम सही सलामत था।

बता दें कि इस घटना के बाद सऊदी अरब के शाही परिवार ने और ज़्यादा कट्टरपंथी इस्लामिक छवि बनाने का प्रयास किया। उन्होंने बहुत से परिवर्तन किए और जिहाद को बढ़ावा दिया। मक्का की मस्जिद में इस घटना के कारण ही वहाबियों की नई पीढ़ियों को आने वाले सालों में प्रेरणा मिली थी।